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गरीब की भूख

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आज सुबह मेरे दोस्त ने मुझे फोन किया  और कहा की आज एक विषय पर कहानी लिखो -गरीब की भूख , मुझे थोड़ी हैरानी हुयी, “ये क्या ! आज ये क्या विषय दे दिया ‘गरीब की भूख ’, ये तो निबन्ध लिखने का विषय है, इस पर कहानी कैसे लिखी जा सकती है “…थोडा विरोध था मन में, मगर जाने क्या हुआ, मैंने सोचा “चलो रहने देते है, देखते है, आज अपनी प्रतिभा को भी आजमाते है ….

.

उसके बाद मैं अपने कार्यालय के लिये चल पड़ा, मगर आज मन बेचैन था, आखिर गरीब की भूखपर कोई कहानी कैसे लिखी जाये…सोचते सोचते कब मैं अपनी मंजिल तक आ पंहुचा, मुझे पता नहीं चला … कार्यालय में भी मन नहीं लग रहा था, आखिर सवाल ही ऐसा था, जो मन के साथ साथ दिमाग से भी खेल रहा था…

.

मैंने कार्यालय में बीमार होने की बात कह, निकल पड़ा गरीबो  की खोज में ….. मैंने तलाश शुरू की, नॉएडा के छोटे छोटे गावों से, कस्बो से .. मगर ये क्या ? यहाँ भी सब अमीर  है, यहाँ भी कोई गरीब नहीं….

तभी मेरे सामने  से एक छोटा बच्चा दौड़ता हुआ आ रहा था , उम्र यही कोई ७-८ साल, सलमान का दीवाना लग रहा था, लोग ६ पैक के लिये जिम जाते है, और मुझे उसके शरीर पर ८ से ज्यादा पैक दिख रहे थे…

मैंने उसे आवाज़ देकर रोका और पूछा “बेटा यहाँ सबसे गरीब इंसान कौन है ? मैं सुबह से भटक रहा हूँ, कोई गरीब ही नहीं दिखाई दे रहा है, क्या दुनिया से गरीबी जा चुकी है या मैं पागलपन के शुरुवाती  दौर में कदम रख रहा हूँ ”

बच्चा मेरी बात काटते हुये बोला “ये तो हमारे भगवान  की कृपा है, उनकी वजह से अब कोई गरीब नहीं है, सब अमीर  है .” मैंने गुस्साते  हुये  पूछा “ऐसा कौन सा भगवान आ गया है, जिसने गरीबी को दूर कर दिया, बता लड़के ??” वो भागते हुये गया और एक तस्वीर लेकर आया, किसी नेता की थी, और बोला ” यही है हमारे भगवान, जिन्होंने २१ रुपये कमाने वाले को भी अमीरों का दर्ज़ा दे दिया है, अब हम सब अमीर है | खाने के लिये चार दिन से कुछ नहीं मिला, मगर हम अमीर है | कपडे नहीं है शरीर पर, फिर भी हम अमीर है | वो छोडो अंकल, अब तो हम किसी से भीख भी नहीं मांग सकते, आखिर हम भी अमीर जो ठहरे ”

मैं बच्चे को देखता ही रह गया और वो नजरो के आगे से भागता हुआ निकल गया … मैं भी अब गरीबो की तलाश या उनकी भूख को रास्ते में ही छोड, घर आ गया …

२–४ चाय की चुस्की ली और मन ही मन सोचा जब गरीब ही नहीं रहे तो गरीब की भूख … आज का विषय ही बकवास है ……..

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38 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yatindrapandey के द्वारा
August 9, 2013

हैलो सुमित जी सच मे ये विषय बकवास ही होता जा रहा है दरअसल नोटों की लकीरे हाथो की लकीरों से जादा बड़ी हो गयी है हम उसे नहीं देख पा रहे और कतो देखे हमारे आकडे जो बिगड़ जायेंगे सुन्दर लेख के लिए आभार स्वीकार करे यतीन्द्र

veer suryavanshi के द्वारा
August 8, 2013

आपकी रचना काफी प्रभावशाली है सुन्दर अभिव्यक्ति । वो भागते हुये गया और एक तस्वीर लेकर आया, किसी नेता की थी, और बोला ” यही है हमारे भगवान, जिन्होंने २१ रुपये कमाने वाले को भी अमीरों का दर्ज़ा दे दिया है, अब हम सब अमीर है | खाने के लिये चार दिन से कुछ नहीं मिला, मगर हम अमीर है | कपडे नहीं है शरीर पर, फिर भी हम अमीर है | वो छोडो अंकल, अब तो हम किसी से भीख भी नहीं मांग सकते, आखिर हम भी अमीर जो ठहरे ” यें सत्य है कि आज कल नेता केवल गरीबों को मिटा रहे है  

Jaishree Verma के द्वारा
August 5, 2013

गरीबी रेखा को ऊपर -नीचे करना ये राजनीतिक खेल हैं ! सच्चाई तो यह है कि गरीबी को सीमा रेखा में बाँधने से वो दूर कभी नहीं हो सकती !इसके लिए विकास दर,अशिक्षा और जनसंख्या जिम्मेदार है सुमित जी !

    Sumit के द्वारा
    August 5, 2013

    ह्म्म्म समझ रहा हूँ….

harirawat के द्वारा
August 5, 2013

सुमीत सत्य बचन, जब तक तख़्त पर एक ऐसा इंसान बैठा होगा जो रिमोट से चलता है जिसके तख़्त के नीचे भ्रष्टाचार पलता है, गरीब किसानो की चीत्कार उसकी कोठी की दीवारों से टकरा कर वापिस लौट जाती है, जिसकी भुजाएं तो हैं काबू में नहीं हैं, जिसके कान हैं पर सुनते ही नहीं हैं, वहां गरीब बच्चों की आवाज कौन सुनेगा, उनके भूखे पेट को कौन देखेगा ? जब तक इस देश में बंश पे बंश आगे बढेगा एक गरीब ढूँढने जावोगे पूरा शहर मिलेगा ! बहु सुन्दर लेख के लिए बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो

    Sumit के द्वारा
    August 5, 2013

    शुक्रिया हरी जी ,,,,,

ajaykumarjha के द्वारा
August 4, 2013

आज के सच को और अंतर्मन को झकझोरती पोस्ट । सामयिक और सार्थक लेखन के लिए बधाई और शुभकामनाएं आपको

    Sumit के द्वारा
    August 5, 2013

    अजय जी अपना कीमती वक़्त देने के लिए शुक्रिया

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
August 4, 2013

सरकार के भरोषी हाथ पर हाथ धर कर बैठने वाले ही गरीब है / “अपना हाथ जगन्नाथ ” के मंत्र का जाप करने वाले कभी गरीब नहीं होते /

    Sumit के द्वारा
    August 4, 2013

    कुछ करे तभी गरीबी दूर होगी

jlsingh के द्वारा
August 4, 2013

अच्छा आलेख!

    Sumit के द्वारा
    August 4, 2013

    शुक्रिया सर जी

aksaditya के द्वारा
August 3, 2013

वाह..ऐसा व्यंग..बधाई

    Sumit के द्वारा
    August 4, 2013

    शुक्रिया आदित्य जी

August 3, 2013

ye hi sachchai hai .

    Sumit के द्वारा
    August 3, 2013

    शुक्रिया शालिनी जी

Sushma Gupta के द्वारा
August 2, 2013

सुमित जी ,’ गरीव की भूख ‘ की तलाश आपकी अभी नाकाफी है ,इसके लिए आप उन हजारों ,लाखों गांवों में जाएँ , जहां के किसान बंधुआ मजदूरी करके अरवों टन अनाज उत्त्पन्न करने के बाद भी अपने पूरे परिबार के लिए दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पाते, आज भी सरकार की गलत नीतिओं के कारण वे किसान आये -दिन आत्महत्या भी करते रहते हैं…यह देश केवल कागजों में ही गरीवी रेखा से ऊपर है पर सच यही है की बदती महगाई के कारण इस देश में गरीवी की बीमारी बदती जा रही है…

    Sumit के द्वारा
    August 2, 2013

    सुषमा जी @ सबने मेरा विरोध किय… मगर इस विरोध के चलते मेरे दिमाग में एक और गरीब नज़र आया है, जो स्शायद सबसे गरीब है। । जल्दी पढने के लिए मिलेगा

    nishamittal के द्वारा
    August 3, 2013

    सुषमा जी से सहमत हूँ पूर्णतया

    alkargupta1 के द्वारा
    August 6, 2013

    सुषमाजी के विचारों के साथ मेरी पूर्ण सहमति

    Sumit के द्वारा
    August 7, 2013

    अलका जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

August 2, 2013

सुस्वागतम………………जब गरीब ही नहीं रहे तो गरीब की भूख … आज का विषय ही बकवास है ……………………….सुन्दर व्यंग्य …….और कडवी सच्चाई ………हार्दिक आभार!

    Sumit के द्वारा
    August 2, 2013

    प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

aman kumar के द्वारा
August 1, 2013

सुमित मेरे भाई ,अच्छी कहानी , दिल से लिखी , अभी तुम्हारी समाजवादी उम्र है , मेरी इच्चा है लेखक ही नही एक आन्दोलन बनो !

    Sumit के द्वारा
    August 2, 2013

    सलाह देने के लिए शुक्रिया अमन जी

Malik Parveen के द्वारा
August 1, 2013

“जाके पैर न फटी बिवाई वो क्या जाने पीर पराई “……… जब भूख सताती है तो इंसान दानव बन जाता है ! भूख अमीर की हो गरीब की भूख भूख होती है ! बहुत बढ़िया लिखा सुमित बधाई !

    Sumit के द्वारा
    August 1, 2013

    शुक्रिया … आपने बिलकुल सही कहा परवीन दी

sudhajaiswal के द्वारा
July 31, 2013

सुमित जी, आपने बहुत अच्छा लिखा है पर मुझे भी ये लगता है की गरीब अपनी गरीबी के लिए खुद भी कम जिम्मेदार नहीं है कर्म में विश्वास कम और दया का पात्र बनने में ज्यादा ध्यान लगते हैं |

    Sumit के द्वारा
    August 1, 2013

    सुधा जी , प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

Manisha Singh Raghav के द्वारा
July 31, 2013

सुमित जी , आपकी कहानी ” गरीब ….” पढ़ी . बहुत ही उम्दा . सुमित जी अगर आप मेरे अनुभव की बात करें तो भारत में गरीब कम निकम्मों की फौज ज्यादा है . खाने को चाहे घर में खाना हो या न हो पर छोटे छोटे बच्चों को मीठी सुपारी और पान मसाला के लिए पैसे जरुर होंगे . भीख माँगने में सबसे आगे और काम करने के मामले में महाचोर . यही है भारत के गरीबों का सच अगर हो सके तो आप मेरा लेख ” मीठा जहर ” पढिये .

    Sumit के द्वारा
    July 31, 2013

    प्रतिक्रिया के लिये शुक्रिया मनीषा जी

ashishgonda के द्वारा
July 31, 2013

पूरे शीर्षक को एक अलग तरीके से कहने का बहुत बढ़िया ढंग… गरीबों को किसी चीज कि भूंख नहीं होते वरना धन की भूंख हो जाए और वो भी अमीर हो जाये इसी मंच पर पढ़ी ये चार पंक्तियाँ याद आ गई “जितने गरीब थे सब मुंह ढक के सो गये बस रात भर जो जागर धनवान रह गया.. बल्बों कि रौशनी में भी खिलने लगे कमल सूरज तमाशा देख कर हैरान रह गया

    sumit के द्वारा
    July 31, 2013

    आशीष जी @ शुक्रिया, साथ में बेहद खुबसूरत पंक्तियाँ की प्रस्तुती

sinsera के द्वारा
July 31, 2013

इतनी जल्दी हार क्यों मान ली..थोडा आगे चलते तो हाथ में मोबाइल लिए हुए गरीब भी मिलते , जिनके माता पिता सडको पर कबाड़ इकठ्ठा करते हैं और बच्चे पढने लिखने के सिवा दुनिया का हर काम कर के गरीब कहलाते हैं, जिनको गरीबी भत्ता मिलने में भी उतना ही इंटरेस्ट है जितना फर्स्ट डे फर्स्ट शो की मूवी देखने में …गरीबो की क्या कमी है…गोद में बच्चा लिए भीख मांगती हट्टी कट्टी जवान गरीब माएं, खर पतवार की तरह पैदा कर के जुर्म करने के लिए सडको पर छोड़ दिए गए गरीब अपराधी माँ बाप के भावी अपराधी गरीब बच्चे…टेरिटरी के लिए लड़ने वाले बोरे के नीचे नोट बिछा कर सोने वाले गरीब भिखारी..बहुत लम्बी लिस्ट है…… और कोई न मिलता तो हम गरीब तो हैं ही..”बना कर फकीरों का हम भेस ग़ालिब, तमाशा-ए -अहले करम देखते हैं….”

    rekhafbd के द्वारा
    July 31, 2013

    मै सरिता जी से पूर्णतया सहमत हूँ ,भिखारी भीख मांग कर खाना पसंद करेंगे ,मेहनत कर के नही ,आभार

    sumit के द्वारा
    July 31, 2013

    कमियों की तरफ ध्यान दिलाने हेतु शुक्रिया … वैसे मैं भी गरीब ही हूँ ;)

    Sumit के द्वारा
    August 1, 2013

    रेखा जी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया


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