Main Aur Meri Tanhai

Just another weblog

59 Posts

806 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8097 postid : 771121

जरुरी है सही सोच (नजरिया )

  • SocialTwist Tell-a-Friend

महिलाओ के प्रति अपराध रोकने के लिए कानून का लागू होना अति आवश्यक है | भारत में महिलाओ से जुड़े 50 से ज्यादा कानून होते हुए भी महिला अपराध के मामले निरन्तर बढ़ते जा रहे है, जिसमे  बलात्कार ही नहीं अपितु यौन उत्पीडन और दहेज़ हत्या जैसे मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है | इन विषयों को सोशल साईट पर एवं निजी संस्थानों द्वारा बहस का मुद्दा बना दिया जाता है जबकि बहस का मुद्दा, कानून व्यवस्था को मजबूत बनाना और घटनाओ पर लगाम कैसे कसी जाये, होने चाहिए |

इसके लिए बदलाव की आवश्यकता है और इस बदलाव की शुरुवात हमे खुद से करनी होगी |

.
सर्वप्रथम युवाओ की मानसिकता में बदलाव होना, अति आवश्यक है | गंभीरतापूर्वक सोचने वाला तथ्य है कि आख़िरकार युवा पीढ़ी के कोमल मन पर फूहड़ता और अश्लीलता नामक धूल की चादर दिन-ब-दिन चढ़ती जा रही है, क्यों और कैसे ? युवा पीढ़ी को फूहड़ता और अश्लीलता से दूर रखने के लिए सर्वप्रथम युवा मन को इतना मजबूत बनाने की आवश्यकता है कि युवा फूहड़ और अश्लील गीत-संगीत, फिल्मे और अश्लील विज्ञापनों को नज़रंदाज़ करने साहस जुटा सके, और फूहड़ता और अश्लीलता से दूरी स्थापित कर ले क्योंकि अश्लीलता का बाज़ार कितना भी पावरफुल क्यों न हो, खरीददार की ताकत के आगे उसकी एक नहीं चलती | इसके साथ ही ऐसे बाजारों पर भी लगाम कसने की जरुरत है जहाँ एक नारी/स्त्री/महिला को किसी वस्तु की तरह परोसा जाता है | इसके साथ ही साथ जरुरी है कि जहाँ चार दोस्त एक दुसरे के साथ हँसी-मजाक करते हुए बहन को मात्र उपभोग का पात्र समझकर व्यवहार न करे | जरुरी है कि माँ-बहन के नाम पर भद्दी गालियों का प्रयोग न किया जाये | जरुरी यह भी है कि किसी फूहड़ता से परिपूर्ण कार्यक्रम /आयोजन पर पैसा और समय बरबाद करने की बजाय किसी जरूरतमंद की मदद की जाये |

.
एक बड़ी पहल मीडिया चैनल की सोच को बदलना या बदल कर भी की जा सकती है | छात्रा के साथ बलात्कार, दो महिलाओ के साथ घर में घुसकर बलात्कार, 5 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार या बुजर्ग महिला के साथ बलात्कार, और जाने इस तरह की कितनी ही खबरें मीडिया चैनल दिन भर फ्लेश करता रहता है | गौर देने योग्य बात है कि इस तरह की हर खबर में सारा जोर पीड़िता पर दिया जाता है, अपराधी की कही बात नहीं की जाती | मीडिया चैनल स्पेशल प्रोग्राम के नाम पर, महिला/लड़की ने किस तरह के वस्त्र पहने थे, उसके पास क्या क्या सामान था, उसके अपने आस-पड़ोस से कैसे सम्बन्ध थे, अपराधी ने बलात्कार के समय और बलात्कार के बाद किस किस अंग पर वार किया इत्यादि बातें बताता है, यहाँ भी अपराधी का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं मिलता | कुल मिलाकर  मीडिया चैनल भी बलात्कार शिकार महिला/लड़की को एक प्राणी की तरह नहीं बल्कि एक आकर्षक वस्तु की तरह जनता के सामने परोसता है, जिसमे अपराधी और अपराध की कही बात नहीं की जाती, बस पेश किया जाता है दिन भर व्यस्त (TRP हेतु) रखने का कार्यक्रम |

.
आख़िरकार राजनितिक पार्टियां भी महिलाओ की सुरक्षा के मुद्दों को नज़रंदाज़ करती है | चुनाव से चुनाव पर होने वाले घोषणा पत्रों में भी महिलाओ से जुड़े मुद्दों को या तो स्थान नहीं दिया जाता या फिर अंतिम में चलताऊ तरीके से पेश किया जाता है | राजनितिक पार्टियों के इस तरह के भेद-भाव के खिलाफ जनमानस को अपना आक्रोश दिखाना होगा |

.

स्त्री के अस्तित्व के दमन की प्रक्रियां को रोकना होगा | बलात्कार जैसे अपराध पर चुप्पी साधने के बजाय, ये समझना होगा कि बलात्कार एक अपराध है और इसे करने वाला एक अपराधी | जिस महिला के साथ ये अपराध हुआ है, उसको घर्णित / हीनभाव से भरी नजरो से देखने के बजाय, उसको एक साधारण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाये | हमे समझना चाहिए कि कानून व्यवस्था  के तहत महिलाओ के लिए न्याय की उम्मीद रखना नामुमकिन है | सिर्फ कानून व्यवस्था को कोसने से बदलाव न हुआ है और न ही हो सकता है क्योंकि लोकतंत्र एवं समाज के निर्माण में कानून का स्थान बाद में है, जबकि मर्यादित व्यवहार (फिर चाहे वो राजनितिक दल हो या मीडिया चैनल ) की भूमिका सर्वप्रथम है |

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 4.20 out of 5)
Loading ... Loading ...

12 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aksaditya के द्वारा
August 15, 2014

बढ़िया सुमित जी..

    Sumit के द्वारा
    August 16, 2014

    shukriya sir ji

jlsingh के द्वारा
August 9, 2014

प्रिय सुमित जी, सादर अभिवादन! आपने हर पहलू को बहुत ही बारीकी से विश्लेषण किया है. आपके दवरा बताये गए सुझाव अनुकरणीय है. पर इसकी शुरुआत कैसे और कहाँ से होनी चाहिए अभी भी अनुत्तरित है. मानता हूँ इसकी शुरुआत घर से ही होनी चाहिए. घर से समाज, समाज से क्षेत्र और उसके बाद व्यापकता.को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. इसके लिए मीडिया को पहल करने की जरूरत है.फ़िल्में और सीरियल्स पर सेंसरशिप जरूरी है. पोर्न साइट्स प्रतिबंधित होने चाहिए…इन सबमे हमारे जान प्रतिनिधि, समाज के मुखिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी योगदान आवश्यक है…बाकी आपने बहुत कुछ लिखा है इस आलेख को भी ब्यापकता मिलनी चाहिए ..आपके इस आलेख को अन्य माध्यमों से भी प्रसारित प्रचारित किया जाना चाहिए. ऐसे विचार को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाना चाहिए….और भी बहुत कुछ युवाओं को रचनात्मक कामों में अधिक से अधिक समय गुजरना चाहिए, अध्यात्म और योग का प्रयोग यहाँ होने चाहिए…मेरे ऐसे ही कुछ विचार हैं… आपको अच्छे आलेख के लिए बधाई और शुभकामनाएं

    sumit के द्वारा
    August 9, 2014

    सर आपने बिलकुल सही कहा, और ज्यादा देर न करते हुए हमे इसकी शुरुवात कर देनी चाहिए

August 8, 2014

सहमत हूँ आपसे .

    sumit के द्वारा
    August 9, 2014

    शुक्रिया शालिनी जी

Shobha के द्वारा
August 6, 2014

सुमित महिलाओं के प्रति दर्द और अच्छी भावना समाज मे आप जैसी आयु वर्ग के जब अपराध और अपराधी की निंदा करंगे समाज में अच्छी सोच जाएगी डॉ शोभा

    sumit के द्वारा
    August 7, 2014

    शोभा जी, बिलकुल । कल का भविष्य आज के हाथ में ही होता है और ये समझना बहुत जरुरी है

aman kumar के द्वारा
August 6, 2014

अपनी प्रतिभा का सही उपयोग सुमित को सफल बना सकता है अच्छा प्रयास ऍ

    Sumit के द्वारा
    August 6, 2014

    शुक्रिया भाई

kanak के द्वारा
August 6, 2014

सत्य के बहुत ही करीब ….. बदलाव जरुरी है

    Sumit के द्वारा
    August 6, 2014

    शुक्रिया कनक जी


topic of the week



latest from jagran